मेरी अपनी ज़िंदगी!
मेरी अपनी ज़िंदगी!
आप सभी जानते हैं कि अभी का वक्त सभी के लिए बहुत बुरा वक्त हैं, चारों तरफ़ कोरोना ही कोरोना काल में गुज़र रहा हैं।
यह वक्त ने सभी के जीवन को अधिक ज्यादा प्रभावित किया हैं। सभी का जीवन अस्त व्यस्त हो गया हैं।
इस वक्त ने खाने से लेकर पहनावे तक की चीज़ो को और स्वास्थ्य तक की ज़रूरत की सभी सेवाओं का हाल बहुत बुरा किया हैं।
इस काल में या इस समय में लोगों का आपस में मिलना जुलना तथा आपस में बात करने के तौर तरीके काफ़ी बदल चुके हैं।
दुःख तो इस बात का हैं मुझे की डॉक्टर जैसे पड़े लिखें लोग इस गंभीर परिस्थिति में भी ना जाने कितने ऐसे मरीज हैं जिनका ठीक से इलाज़ नहीं हो पा रहा हैं। बहुत से डॉक्टरों का किसी भी मरीज का इलाज़ करने का तौर तरीक़ा बदल सा गया हैं।
जो पहले कभी एक डॉक्टर को भगवान समझा जाता हैं आज कि तारिक में वह एक सिर्फ पैसा कमाने का जबरदस्त धंधा बन चूका हैं!
मैं आज इस लेख में किसी कि नहीं बल्कि अपनी ही आप बीती लिख रहा हूं। मैं अपनी पत्नी का इलाज़ कराने एक प्रायवेट डॉक्टर के पास ले कर गया था। उस हॉस्पिटल के डॉक्टर से मिलने के लिए अपॉयमंट मैंने दो दिन पहले ही लें रखा था। मैं उस हॉस्पिटल के अंदर गया तो अन्दर का नजारा देखते ही बन रहा था!
जिस वेटिंग रूम में मैं बैठा था वहा और भी मरीज थे। जब हमारा नंबर आया तो हमें एक बंद केबिन में बैठने को बोला गया और हम बैठे भी लेकिन ठीक से दो लोगों के बैठने की जगह भी नहीं थी।
उस केबिन में एक स्पीकर माइक लगा हुआ था और एक माइक्रोस्कोप बहुत लंबा सा लगा हुआ था। जब डॉक्टर से हमारी बातें एक स्पीकर द्वारा हुईं तो मुझे बहुत तकलीफ़ हुईं क्यों कि एक डॉक्टर और मरीज की दूरी बहुत दूर में थी।
करीबन 6 मीटर की दूरियां थीं, जब कोई मरीज डॉक्टर से अपनी तकलीफ़ सुनता हैं तो उस समय उस डॉक्टर की सहानुभूति कि बहुत ज़रूरत होती हैं।
उस डॉक्टर की आवाज़ उस जगह लगें स्पीकर में ठीक से नहीं आ रही थीं, ना ही हमारी आवाज़ डॉक्टर तक ठीक से पहुंच पा रही थीं। अब सोचने वाली बात यह हैं कि जब एक मरीज़ कि तकलीफ़ एक डॉक्टर को दिखाई और ना सुनाई नहीं आ रहा हो, तो वह डॉक्टर किस तरीक़े से उस मरीज का इलाज़ कर सकेगा?
वक्त की मार देखो सारी बीमारियां या कई प्रकार के रोग समाप्त हो गए हैं! बस अभी के वक्त में सभी को एक ही रोग हैं या बीमारी हैं और वह हैं "कोरोना"
आज कि तारिक में जिस किसी भी हॉस्पिटल या क्लानिक तथा दवाखाने में किसी भी बीमारियों का इलाज़ के लिए जाना पड़ रहा हो, तो सबसे पहले उस मरीज़ को कोरोना चेकअप करवाया जायेगा।
जब तक उस मरीज़ कि रिपोर्ट नहीं आ जाती तब तक सायाद उसका इलाज़ असंभव हैं। चाहें वह मरीज़ कितनी भी तकलीब में क्यों ना हों।
कहने में बिल्कुल भी ग़लत नहीं कि सभी सरकारी हॉस्पिटल से लेकर प्रायवेट दवाखानों तक कोरोना के नाम पर गोरखधंधा चलाया जा रहा हैं।
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