मेरी अपनी ज़िंदगी!
मेरी अपनी ज़िन्दगी!
नमस्कार दोस्तों ।
आज इस पोस्ट में मैं अपनी ज़िंदगी के बारे में लिख रहा हैं। पिछले कुछ महीनों से मेरी ज़िन्दगी में बहुत सारी परेशानियों कि शुरवात होने शुरू हो गई थीं। परेशानियां तो सभी के जीवन में आते जाते रहती हैं।
मैंने सपने में भी नहीं सोचा था कि मेरे जीवन में भी कभी इतने बुरे दिनों की शुरवात होंगी। हस्ती खेलती हुई ज़िंदगी में दुःख का बहुत बड़ा पहाड़ आ गिरा।
कभी कभी ना समझदारी इतनी भारी पड़ सकती हैं यह जाना नहीं था। दोष मैं अपनी पत्नी को भी नहीं देना चाहता!
जितनी गलती उसकी हैं उतनी ही गलती मेरी भी हैं।
एक सरदर्द कि तकलीफ़ किड़नी जैसी गंभीर बीमारी का रूप ले लेगा यह मानना और यकीन करना बहुत मुश्किल हैं।
सच कहूं यह मेरे लिए और मेरी ज़िन्दगी में इस प्रकार की बीमारी का आ के थम जाना यह सोच के परे हैं?
यह खराब वक्त की शुरवात इस प्रकार से हुई हैं कि मुझे लिखने में भी रोना आता हैं!
गुर्दे की बीमारी कब से शुरू हुईं यह बता पाना कठीन हैं, सायद यह रोग मेरी पत्नी को तीन से चार वर्ष के अंतराल में ही शुरवात रहीं हों लेकिन इस रोग के लक्षण को हम दोनों समझ नहीं सकें?
हल्की फुल्की सर्दी जुखाम अकसर पंद्रह दिनों में या महीने के अंतराल में होते ही रहता था। कभी कबार जोरों से सिरदर्द कि समस्या रहा करती थी।
ऐसा नहीं कि सर्दी जुखाम और सरदर्द का इलाज़ ना कराए हों डॉक्टर के इलाज़ अनुसार ही पेंकिलर कि दवाइयां चलती रहीं लेकिन हमें ये पता नहीं था कि यहीं दवाइयां एक दिन बहुत बड़ी बीमारी ले कर आयेगी!
पत्नी की सबसे ज्यादा लापरवाही एक और देखने को मिलीं कि वह अपनी दिनचर्या में पानी का सेवन बहुत हीं कम रखा करती थीं। जिसका परिणाम मेरी पत्नी को बहुत गलत मिला।
मैं भी कसूरवार हूं बुरे वक्त का मैं अपनी पत्नी का ठीक से ख्याल नहीं रख सका।
मेरा काम ही ऐसा हैं कि वक्त ही नहीं दे पा रहा हूं। काम के सिलसिले में अक्सर घर से लेकर शहर से बाहर ही जाना पड़ता हैं। घर पर मुश्किल से चार दिन तो काम के लिए छबिस दिन बाहर बिताना पड़ता हैं। "त्रस्त हूं अपनी ज़िंदगी से एक समस्या खत्म होती नहीं" कि दूसरी समस्या खड़ी हो जाती हैं।
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